रक्षा उत्पाद के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनता भारत | भारत बना बड़ा निर्यातक बना - रवि तिवारी (Ravi Tiwari)

बीजेपी के युवा नेता रवि तिवारी (Ravi Tiwari) ने जनता से संवाद करते हुए यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पाद के क्षेत्र में भारत तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। भारत के Defense Export में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गयी है।

 

वह अब बीते दिनों की बात हो चुकी है जब छोटे-मोटे हथियारों के लिए भी भारत को आयात पर निर्भर रहना पड़ता था। मोदी जी के कार्यकाल में भारत देखते ही देखते हथियारों के बड़े आयातक देश से एक निर्यातक देश बनता जा रहा है।

 

रक्षा उत्पादों के क्षेत्र में भारत एक बड़ा निर्यातक बन कर उभरा है। मेड इन इंडिया स्कीम के तहत इस कार्य को अंजाम दिया गया है। जो कि पूरे विश्व में भारत के बढ़ते दबदबे को दर्शाता है।

रक्षा क्षेत्र में कुल कितना है भारत का निर्यात?

 

बीजेपी के युवा नेता रवि तिवारी (Ravi Tiwari) ने आगे कहा कि रक्षा क्षेत्र में निर्यात के दृष्टिकोण से 2014 के बाद से मोदी जी का कार्यकाल एक स्वर्णिम दौर रहा है। भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कार्यकाल में भारत के निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गयी है।

 

रवि तिवारी (Ravi Tiwari) ने आगे कहा कि वर्ष 2014 में रक्षा क्षेत्र में भारत का कुल निर्यात सिर्फ 1,941 करोड़ रुपये था, जो कि 2022-2023 में छलांग लगाते हुए 16,000 करोड़ रुपये पर पहुँच गया है। भारत के अंदर विश्व को राह दिखाने की और प्रतिनिधित्व करने की क्षमता हमेशा से ही मौजूद थी

 

लेकिन एक स्वच्छ राजनैतिक इच्छाशक्ति के अभाव में भारत अपनी योग्यता के साथ उतना न्याय नहीं कर पाया। जितना प्रभुत्व भारत का विश्व पटल पर होना चाहिए उतना कभी भी नहीं रहा। आज भारत को मोदी जी के शासनकाल में अपना खोया सम्मान व गौरव वापस मिल रहा है, जिसके हम सभी भारतवासी अधिकारी हैं।

कितने देशों को हथियार निर्यात कर रहा भारत?

 

बीजेपी के उभरते हुए नेता रवि तिवारी (Ravi Tiwari) ने बताया कि भारत इस समय मोदी जी के शासनकाल में रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। भारत के अत्याधुनिक स्वदेशी निर्मित रक्षा उपकरणों की मांग पूरे विश्व में है।

 

भारत इस समय 85 से अधिक देशों को हथियार निर्यात कर रहा है, जो की बुलंद एवं शक्तिशाली भारत का परिचायक है। आने वाले वर्षो में हम पाएंगे कि इस देशों की संख्या में तेजी से इजाफा होगा और भारत पूरी तरह से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जायेगा। भारतीय हथियारों की मांग पूरे विश्व में होगी।